Living Legends of Ballia

Living Legends of Ballia

Dear Sir/Madam,

Since time immemorial, Ballia, the great capital of bountiful King Bali and ascetic fervour place of the great devotee Lord Bhrigu, has been birthplace of great souls. Time and again, the fertile and revolutionary land has produced amazing legends and heroes who have sacrificed and contributed a lot in the shaping of this great nation. We are proud of the tradition of having great leaders like Mangal Pandey (the first martyr of India’s first struggle for freedom), Chittu Pandey (the first district magistrate of August revolution of Ballia), Jaiprakash Narayan (well known as Loknaayak) and Chandrashekhar (famous as Jannayak and yuva turk). Further, we are the most delighted to acknowledge you as an inspiring exponent of this glorious tradition. It is true that your work place is elsewhere but we feel that you belong to the Ballia Diaspora.
Needless to say that everyone has special affinity towards her/his homeland and cherishes sweet memories forever. Village, family members, childhood friends and the aura in general have a special relevance in one’s life. We do look forward to any occasion to your visit to our place and revisit your reminiscences. Further, we realize that everyone has a strong desire to fulfill debts and duties towards motherland. With this objective in mind, we wish to connect with you.
It is a matter of immense pleasure that Jannayak Chandrashekhar University, Ballia, (Uttar Pradesh) has been founded on 22 December 2016. With your best wishes and support, this University is going to form a forum namely Living Legends of Ballia. This will provide a platform where we can meet and share our thoughts in order to repay the debts to our homeland. The proposed relationship will be mutually beneficial to Ballia as well as its people.
It is our humble request to you to kindly associate with this forum and oblige us with your suggestions and guidance.
With warm regards.
Sincerely yours,
Prof.(Kalplata Pandey),
Vice-Chancellor.

मान्यवर,
दानवीर राजा बलि की राजधानी एवं महर्षि भृगु की तपोस्थली बलिया अनादिकाल से महापुरुषों की जन्मस्थली रही है। प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के प्रथम बलिदानी मंगल पाण्डेय हों या अगस्त क्रान्ति में स्वतंत्र हुए बलिया जनपद के प्रथम जिलाधीश चित्तू पाण्डेय, लोकनायक जयप्रकाश नारायण हों या जननायक चन्द्रशेखर, बलिया की माटी से उपजे राष्ट्र नायकों की एक अविच्छिन्न परम्परा रही है। हम आपको इसी परम्परा की एक कड़ी के रूप में देखते हैं और भले ही आपकी कर्मस्थली कोई भी हो बलिया आपकी जन्मस्थली है, आप बलिया की महान विभूतियों में से एक हैं।
प्रत्येक व्यक्ति का अपनी मातृभूमि से विशेष लगाव होता है। वह हमेशा अपने बालपन की स्मृतियों को, अपने घर-गाँव की स्मृतियों को अपने हृदय में संजोये रखता है। वह बार-बार अपनी जन्मभूमि पर वापस लौटना, उसकी गोद में खेलना चाहता है, अपनी मातृभूमि के लिये अपना कर्तव्य निभाना चाहता है। हम इसी उद्देश्य से आपके साथ जुड़ना चाहते हैं।
यह अत्यन्त हर्ष एवं गौरव का विषय है कि बलिया जनपद में जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय की स्थापना 22 दिसम्बर, 2016 को हो गई है। आपके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से यह विश्वविद्यालय स्वयं को एवं बलिया जनपद को गौरवान्वित एवं लाभान्वित करने के लिए ‘बलिया की जीवित विभूतियाँ ‘ ( Living Legends of Ballia ) नामक फोरम का गठन कर रहा है जिससे हम सब साथ-साथ मिल बैठकर इस अनूठी वीर प्रसूता माटी के ऋण से उऋण होने के लिए सम्मिलित प्रयास कर सकें और इस क्षेत्र की युवा पीढ़ी को एक सुनहरे भविष्य की दृष्टि प्रदान कर सकें। आप हमसे जुड़ेंगे तो यह क्षेत्र एवं विश्वविद्यालय तो लाभान्वित होगा ही आप भी अपने मन मस्तिष्क में इस माटी की सुगन्ध को पुनः अनुभव कर सकेंगे।
मेरा आपसे विनम्र अनुरोध है कि आप अवश्य इस फोरम से जुड़ें और अपने महत्वपूर्ण सुझावों एवं दिशा निर्देशों से हमें कृतार्थ करें।
शुभाकांक्षिणी,
प्रो0(कल्पलता पाण्डेय)
कुलपति
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